Dainik Bhaskar Report: भास्कर पॉज़िटिव

दैनिक भास्कर ने अपनी विशेष रिपोर्ट “मंडे पॉज़िटिव” में फुलिया कलां के उस ऐतिहासिक बदलाव को कवर किया है, जिसने सरकारी शिक्षा की तस्वीर बदल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस स्कूल में कभी पेड़ की छांव के नीचे पढ़ाई होती थी, आज वह ‘सेंटर फॉर एकेडमिक एंड स्पोर्ट्स एक्सीलेंस’ (CASE) का रोल मॉडल बन चुका है।
इस बदलाव के नायक, भामाशाह श्री सत्यनारायण लड्ढा जी ने अपने गाँव के स्कूल को संवारने के लिए जयपुर में अपनी फैक्ट्री और बंगला तक बेच दिया। करीब 21 करोड़ रुपये की लागत से 8 बीघा जमीन पर बना यह भव्य स्कूल भवन अब न केवल राजस्थान बल्कि उत्तर भारत में एक उदाहरण है

मुख्य विशेषताएँ (Key Highlights from the News):
- अभूतपूर्व त्याग: श्री लड्ढा ने स्कूल के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत 1.79 करोड़ रुपये भी लौटा दिए और खुद सारा खर्च उठाया। इसमें उनकी अमेरिका में कार्यरत बेटियों और बेटे ने भी सहयोग किया।
- वियतनाम से आया टर्फ: बच्चों में हॉकी का जुनून देखकर 7 करोड़ रुपये की लागत से ‘सेंड सिंथेटिक टर्फ’ (Sand Synthetic Turf) वियतनाम से मंगवाया गया।
- FIH मान्यता: यह उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा टर्फ है जिसे अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) से मान्यता मिली है, जहाँ अब अंतर्राष्ट्रीय मैच भी हो सकते हैं।
- हाई-टेक सुविधाएं: स्कूल में 48 कमरे, 16 स्मार्ट पैनल, 64 सीसीटीवी कैमरे, रोबोटिक्स लैब और स्टीम (STEAM) एजुकेशन प्लेटफॉर्म की सुविधा है।
- 10 साल तक रखरखाव: भामाशाह परिवार ने अगले 10 साल तक स्कूल की देखरेख का जिम्मा भी लिया है।
यह खबर साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो गाँव का स्कूल भी फाइव स्टार सुविधाओं से लैस हो सकता है।

